मासूमों पर अत्याचार

रीढ़ उनकी कभी थी ही नही,
तभी मासूमों की जान बची नहीं।

वो दर्द में रोता रहा,
और सब भीष्म बन अन्याय देखते रहे।

ना मिली एक वक्त की रोटी उसे,
पर मिली चाबुक की चुनौती उसे।

पीड़ा उसकी ना समझ सकेगा कोई
रूह उसकी थी जब कष्ट से रोई।

रीढ़ उनकी कभी थी ही नही
तभी मासूमों की जान बची नहीं💔

सुना था दिल उनका समंदर है

सुना था दिल उनका समंदर है
खिलाते वह सबको लंगर हैं।
फिर क्यों ना दी गई एक रोटी उनसे?
कहते लंगर लंगर है।

क्या गलती की उस मासूम ने?
एक रोटी ही तो चाहिए थी उसे।

क्या नहीं कांपे हाथ उनके?
जब चीख रहा था वो बच्चा दर्द से।

सुना था दिल उनका समंदर है
खिलाते वह सबको लंगर हैं।

कलम का कमाल

जादू कलम में नहीं, लेकिन उसको मिलने वाली प्रेरणा में है।

जादू तो आपके लिखे शब्दों में है,
जो हमारी कलम में जान डाल देती हैं।

जादू आपके अध्ययन में है,
जो हमें लिखने पे मजबूर कर देती है।

यह आपका कमाल है,
जो हमारी कलम को जोश से भर देती है।🔥❤️✍️

ऐसा भारत हो मेरा

ऐसा भारत हो मेरा
जहां हर नारी का सम्मान हो

हर गरीब का कल्याण हो,
हर बच्चे के नसीब में तीन वक्त की रोटी, और हाथ में किताब हो।

ऐसा भारत हो मेरा,
जहां सबको सही गलत का आभास हो
मलेच्छों का स्वागत नहीं,
बल्कि उनसे लड़ने की ताकत हो।

चलो भारत को स्वर्णिम बनाए
चलो एक नया इतिहास रचाएं

जो लांघे वह लक्ष्मणरेखा

जो करे कोई दुष्कर्म यहां,
तेरी मिट्टी में उसे हमेशा के लिए सुला दूं।

जो मेरी सभ्यता का करे शिकार,
जो करे किसी मासूम पर अत्याचार,
उस पापी का मैं बन दुर्गा, करूं संहार।

गर ना चले वो धर्म के पथ पर
तो बन नरसिंह, करूं उसपर वार।

जो लांघे वह लक्ष्मणरेखा,
बन राम करूं, रावण जैसा वध।

सब यहां पैसे में तुलता है

मान या ना मान
सब यहां पैसे में तुलता है,

ईमान भी बिका यहां,
इंसान भगवान से ज़्यादा
पैसों को पूजता है।

अरे मूर्ख इंसान,
क्यों तू खुद को,
इन जानवरों को बेचता है?!

अगर पैसा ही है तेरी पहचान,
तो जल्द ही टूटेगा, तेरा ये अभिमान।

फाड़ दो जो सम न हो संविधान

फाड़ दो जो सम न हो संविधान
ना रख सके जो किसी को एक साथ,
ना दिला सके सबको सम्मान।

जो दे राज्यों को असीमित अधिकार,
के कर सकें वो शोषण अबला का अपार।

इस कागज को क्षमता की नही परगाह,
क्योंकि जाती राजनीति ही है इसका आधार।

ना दुहराव सके जो कोई कभी
वही है इस देश का जटिल संविधान।

जब तक इंडिया से भारत की दूरी है

ये आजादी तब तक अधुरी है
जब तक इंडिया से भारत की दूरी है

जब होगी सशक्त हर एक नारी यहां
जब बेटियां शेरनी बन तोड़ेंगी बेड़ियों को।

जब होगा गर्व हमें अपनी संस्तुति
और अपने स्वदेशी अस्तित्व पर।

तभी होगी इंडिया से भारत की दूरी समाप्त,
और मिलेगी आज़ादी पूर्ण स्वरूप।

तू है शेरनी..

तू है शेरनी
तो दहाड़ अभी
कर शिकारियों का वध
दिखलादे अपनी शक्ति कभी।

भारत की वह नारी है
जिसने शेरनी बन इतिहास में सेना संभाली है
न भूलो रानी लक्ष्मी बाई को
जिनकी दहाड़ गूंजती है आज भी हर गली, हर चौक।

हे नारी उठाले अपने शस्त्र अब
तोड़ पिंजड़ा, बन शेरनी तू अब।

सीखा तुझसे,धर्म का आधार,

अरि ओ कान्हा
तुझे है माना
तुझे है जाना,

सीखा तुझसे,
धर्म का आधार,
अधर्मियों पर करना वार।

तेरे अनेक रूपों को है
अब मैंने पहचाना,
चाहे हो वो राम, जगन्नाथ या श्याम,
अब है बस मुख पर तेरा ही नाम
जय श्री राम, जय श्री राम।

Patriarchy

इतिहास के पन्नो में झांक कर देख लो
जब जब सिंहनी ने तलवार उठाई
तब तब शिकारियों का विध्वंश हुआ।

जो मेहरबान, बहेनो को हिजाबी बेड़ियों में हुए बांधे,
लगता है वो हैं, अपरिचित सिंहनी के दहाड़ और प्रहर से।

ये नकाब, ये पर्दा,
हैं पितृसत्तात्मकता (Patriarchy) का नतीजा।

लड़की हूं

लड़की हूं
सम्मान पाने के लिए
सम्मान देना भी जानती हूं।

अगर न कर सकूं किसी लड़के का सम्मान,
तो नही है मेरा इसपर भी कोई अधिकार।

शब्द जो मेरे करे किसी का अपमान
तो नही होना चाहिए मुझे उसके पलट वार पर नाराज़।

लड़की हूं
और इंसानियत ही होनी चाहिए मेरी पहचान।

क्यों अंग्रेज़ो के लिए खून की नादिया बहाई थी

कहते है बहुत लोग चरखे से आज़ादी आयी थी
क्यों अंग्रेज़ो के लिए खून की नादिया बहाई थी

हम ही लड़े थे भारती के केसरी लाल
विश्व युद्ध में हम थे अंग्रेज़ो की ढाल

जिसने हमारे रक्त मांस की बोली लगायी थी
क्या वही कहते है चरखे से आज़ादी आयी थी।

अमर रहे मां भारती के वीर सपूत उधम सिंह🙏

वो निडर चले…

वो निडर चले,
वो निरंतर चले,
तन पर गेरुआ वस्त्र डाले,
मन में दृढ़ संकल्प लिए।

शिकारी का कर खात्मा,
महिलाओं को सशक्त बनाया।
जंगल राज को खतम कर
राम राज्य की ओर चले।
देश विरोधी, देश द्रोही को पकड़,
अन्य राज्यो के लिए एक उदहारण बनाया।
#YogiAdityanath

आज़ादी तो मांग लाए,…

आज़ादी तो मांग लाए,
मगर फिर भी न हो पाई आज़ाद।
यह सोच रही हूं,
इस दर्द को भरूं,
या खुद को होने दूं बरबाद।

जख्म अभी भी हरे हैं,
पर आस लगाए खड़ी हूं,
कि कभी न कभी,
भरेंगे मेरे भी घाव।

इस हंसी के पीछे छिपे दर्द का न है किसी को एहसास, पर जी रही हूं लेकर ये आस कि होंगी मैं आज़ाद

वो बेहया नही, वो नारी है

वो बेहया नही,
वो एक नारी है, जो तुम्हे इस संसार में लाती है।
वो नारी है, जो मरते दम तक अपने बच्चे को चाहती है।
वो नारी है, जो अपने आसू छुपाए, अपनो को हसाती है।
वो नारी है, जो अपने हक के लिए, दुनिया से अकेले ही लढ़ जाती है।

वो बेहया नही, नारी है।

Let’s decolonise love that’s Bollywoody

Here you goYes

I’m not a Colonised GirlfriendI’

ll not ask infinite times”Where are you, what are you doing etc”

But will care for you asking,”have you eaten, are you safe, are you comfortable” Just once!

I’ll not expect anything from you, but will accept everything of youI’ll not expect instant responses,

I’ll not expect a love that’s Bollywoody, as it’s based on fakery

Because I am not a Colonised Girlfriend

Why should I GIVE you space? When you have all the right over it as an individualI’ll surely give you love which is full of patience…

I’ll meet your mom & her mom,I’ll meet your dad & his dadAnd all the girls that you have ever loved ONLY IF you WANT, cause it’s your choice, not my AUTONOMY

Because, I, am not a Colonised Girlfriend

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