Indigenous Bharat Poetry -Hindi Part-I

मासूमों पर अत्याचार रीढ़ उनकी कभी थी ही नही,तभी मासूमों की जान बची नहीं। वो दर्द में रोता रहा,और सब भीष्म बन अन्याय देखते रहे। ना मिली एक वक्त की…